शुक्रवार, 7 अगस्त 2020

राम मंदिर भूमि पूजन में महामहिम राष्ट्रपति को न्योता नहीं दिया ऐसा कयो ?

राम मंदिर भूमि पूजन में महामहिम राष्ट्रपति को न्योता नहीं दिया ऐसा कयो ? 


राम मंदिर भूमिपूजन का 175 को निमंत्रण, स्टेज पर होंगे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत ये 5 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ  (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत बतौर विशिष्ट अतिथि मौजूद रहेंगे. उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ, यूपी की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और नृत्य गोपालदास महाराज स्टेज पर मौजूद रहेंगे.    
36 आध्यात्मिक परंपराओं के 135 संतों को न्योता
यह तो वह महत्व पुर्ण लोग हें जिनको राम मंदिर भूमिपुजन मे न्योता मिला था लेकिन एक सूची वह भी हे जीस को लेकर यहा विवाद चल रहा हे की इन लोगों को क्यो नहीं बुलाया जब के यही वो लोग हे जिनकी वजहा से राम मन्दिर के मुद्दे को इतनी शक्ति मिली थी अब इन हे ही एक तरफ कर दिया ऐसा क्यो यह वोह नाम हें लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती जैसे राम मंदिर आंदोलन का नेतृत्व करने वाले प्रमुख चेहरे राम मंदिर के शिलान्यास कार्यक्रम में नदारद थे. जब इतने लोगो को न्योता दिया था तो इनहे भी बुलाया जा सकता था लेकिन नहीं बुलाया गया 
चलिए ये तो यह भी हो सकता हे के पार्टी में आपसी सहमति के साथ चयान हुआ होगा की किसको न्योता दिया जाए गा किसको नहीं लेकिन राष्ट्रपति महामहिम राम नाथ कोविंद को क्यो नज़र आंदाज़ करा गया जबके वह भारत के प्रथम नागरिक हें इस समारोह मे राष्ट्रपति महामहिम राम नाथ कोविंद को न्योता ना देना उन का अपमान करने जेसा हे यह भारत की जनता का केहना ओर मान्ना हे इस बात का सोशल मीडिया से अंदाज़ा लगाया जा सकता हें कई हज़ारों मे सोशल मीडिया पै पोस्ट मिल जाए गी Twitter, Facebook, Instagram, या What'sapp हो हर सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर मिल जाए गी की राम मन्दिर भुमि पूजन मे राष्ट्रपति महामहिम राम नाथ कोविंद को बुलाना था उन्हें ना बुलाकर मोदी जी ने उन का अपमान करा हें ओर एक बात ओर भी बोली जा रही हें की वह दलित हे इस लिए उन्हें इस समारोह का न्योता नहीं दिया सोशल मीडिया इस तरहा की पोस्ट से भरी पडी हें कुछ पोस्टो पर नज़र डले 
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महाराष्ट्र के मंत्री डॉ नितिन राउत ने भी ये सवाल उठाया है. Chairman 
SC Dept. | Working President 
| Energy Minister, Maharashtra Govt. | Guardian Minister, Nagpur |

महामहिम राष्ट्रपति जी को राम मंदिर भूमिपूजन कार्यक्रम से क्यों दूर रखा गया है? क्योंकि वो दलित है? आरएसएस चीफ वहां किस हैसियत से है? आस्था अपनी जगह और आत्मसम्मान अपनी जगह, भाजपा सरकार राष्ट्रपति जी का अपमान कर रही है और यह सरकार की मनुवादी सोच दर्शाता है।
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sanjay singh
AAP Party of Leader
मेरा से सीधा सवाल है - राष्ट्रपति जी को भूमि पूजन में क्यों नहीं बुलाया गया? क्या इसलिए क्योंकि वो दलित हैं? भाजपा इसका जवाब दे। "Anti Dalit BJP"


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Vikram Saxena


यह बात साबित हो गई है कि ऊंची जाति के मोहन भागवत का दर्जा आज की तारीख में भारत के राष्ट्रपति जो कि एक दलित है रामनाथ कोविंद से ज्यादा है। अब आप कल्पना कीजिए आज से 10 साल बाद के भारत की
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Ajay Singh Yadav
Ajay Singh Yadav. Former Minister (Haryana) of Finance, Revenue, Irrigation, PWD, Jails, Power, Forest, and Social Welfare.
मैं भाजपा की सरकार से पूछना चाहूंगा राष्ट्रपति महामहिम श्री रामनाथ कोविंद को अयोध्या में रामलला मंदिर के शिलान्यास मैं निमंत्रण क्यों नहीं दिया जा रहा जबकि वह देश के सर्वोच्च पद पर आसीन है इसके पीछे क्या राज है प्रधानमंत्री मोदी जी

लोग इस से यह अंदेशा लगा रहे हैं के यह राम राज की बात करते हे ओर लागू मनुस्मृति कर रहे हें जीस से दालित समाज मे बहुत आक्रोश, ओर भाय का महोल हे 

बुधवार, 5 अगस्त 2020

Babri Masjid Will Always be a Masjid-Muslim Personal Law

बाबरी मस्जिद एक मस्जिद थी और हमेशा मस्जिद रहेगी, कब्ज़ा कर लेने से मस्जिद की स्थिति समाप्त नहीं हो सकती :मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

Babri Masjid Will Always be a Masjid-Muslim Personal Law




#BabriMasjid was and will always be a Masjid. #HagiaSophia is a great example for us. Usurpation of the land by an unjust, oppressive, shameful and majority appeasing judgment can't change it's status. No need to be heartbroken. Situations don't last foreve

#BabriMasjid थी और हमेशा मस्जिद ही रहे गी। #HagiaSophia हमारे लिए एक बेहतरीन उदाहरण है। अन्यायपूर्ण, दमनकारी, शर्मनाक और बहुसंख्यक तुष्टिकरण के आधार पर भूमि का पुनर्निर्धारण निर्णय इसे बदल नहीं सकता है। दिल दुखी करने की जरूरत नहीं है। एक जैसी स्थिति हमेशा के लिए नहीं रहती है।


#बाबरी_मस्जिद, मस्जिद थी और सदैव मस्जिद रहेगी। आक्रामक क़ब्ज़े से वास्तविकता नहीं परिवर्तित हो जाती। सुप्रीम कोर्ट ने अपना निर्णय सुनाया लेकिन न्याय को शर्मसार किया है:
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड
नई दिल्ली, 4 अगस्त 2020, आज जबकि बाबरी मस्जिद के स्थान पर एक मंदिर की आधारशिला रखी जा रही है, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड अपने दीर्घकालिक स्टैंड को दोहराना आवश्यक समझता है कि शरीअत की रोशनी में जहां एक बार मस्जिद स्थापित हो जाती है वह क़यामत तक मस्जिद ही रहती है इसलिए बाबरी कल भी मस्जिद थी और आज भी मस्जिद है और इनशाअल्लाह भविष्य में भी रहेगी। मस्जिद में मूर्तियों को रख देने से, पूजा पाठ आरंभ करने से, लम्बे समय से नमाज़ पर प्रतिबंध लगा देने से मस्जिद की स्थिति समाप्त नहीं हो जाती।
आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव हज़रत मौलाना मुहम्मद वली रहमानी ने एक प्रेस बयान में कहा कि यह हमेशा से हमारा स्टैंड रहा है कि बाबरी मस्जिद किसी भी मंदिर या किसी हिंदू पूजा स्थल को ध्वस्त करके नहीं बनाई गई थी। नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने भी पुष्टि की कि बाबरी मस्जिद के नीचे खुदाई में जो अवशेष मिले हैं वे बारहवीं शताब्दी की किसी इमारत के थे, बाबरी मस्जिद के निर्माण से चार सौ वर्ष पूर्व इसलिए किसी मन्दिर को ध्वस्त करके मस्जिद का निर्माण नहीं किया गया। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट तौर पर कहा कि 22 दिसंबर 1949 की रात तक बाबरी मस्जिद में नमाज़ होती रही है। सर्वोच्च न्यायालय का यह भी मानना है कि 22 दिसंबर 1949 को मूर्तियों को रखना अवैध था। सर्वोच्च न्यायालय यह भी मानता है कि 6 दिसंबर 1992 को बाबरी की शहादत एक अवैध, असंवैधानिक और आपराधिक कृत्य था। अफ़सोस कि इन सभी स्पष्ट तथ्यों को स्वीकार करने के बावजूद कोर्ट ने अन्यायपूर्ण निर्णय सुनाया। मस्जिद की ज़मीन उन लोगों को सौंप दी जिन्होंने आपराधिक रूप से मूर्तियों को रखा और इसको शहीद किया।
बोर्ड के महासचिव ने कहा "चूंकि सर्वोच्च न्यायालय देश की सर्वोच्च अदालत है इसलिए उसके अंतिम निर्णय को स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है हालांकि हम यह अवश्य कहेंगें कि यह एक क्रूरतापूर्ण और अन्यायपूर्ण निर्णय है जो बहुसंख्यकों के पक्ष में दिया गया।" सर्वोच्च न्यायालय ने 9 नवंबर 2019 को अपना फैसला सुनाया लेकिन इसने न्याय को अपमानित किया है। अल्हम्दुलिल्लाह भारतीय मुसलमानों के प्रतिनिधित्व व सामूहिक प्लेटफॉर्म ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और अन्य पक्षों ने भी अदालती लड़ाई में कोई कसर नहीं रखी। यहाँ यह कहना अत्यन्त महत्वपूर्ण है कि हिंदुत्व तत्वों का यह पूरा आंदोलन उत्पीड़न, धमकाने, झूठ पर आधारित था। यह एक राजनीतिक आंदोलन था जिसका धर्म या धार्मिक शिक्षाओं से कोई लेना-देना नहीं था। झूठ और उत्पीड़न पर आधारित कोई इमारत देर तक खड़ी नहीं रहती।
महासचिव ने अपने बयान में आगे कहा कि *स्थिति चाहे कितनी भी खराब क्यों न हो, हमें हिम्मत नहीं हारनी चाहिए और हमें अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। हमें विपरीत परिस्थिति में जीने की आदत बनानी चाहिए। स्थिति सदैव एक जैसी नहीं रहती है। अल्लाह तआला क़ुरआन में इरशाद फ़रमाता है { ये समय के उतार चढ़ाव हैं, जिन्हें हम लोगों के बीच प्रसारित करते रहते हैं} इसलिए हमें निराश होने की कदाचित आवश्यकता नहीं है* और हमें स्वयं को स्थिति के सामने समर्पण नहीं करना है। हमारे समक्ष इस्तांबुल की आया सोफ़िया मस्जिद का उदाहरण इस आयत की मुंह बोलती तस्वीर है। मैं भारत के मुसलमानों से अपील करता हूं कि वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले और मस्जिद की भूमि पर मंदिर के निर्माण से हतोत्साहित न हों। हमें याद रखना चाहिए कि तौहीद (एकेश्वरवाद) का विश्व केंद्र और अल्लाह का घर काबा लंबे समय तक बहुदेववाद और मूर्तिपूजा का केंद्र रहा है। अन्ततः मक्का की विजय के बाद प्यारे नबी ﷺ के माध्यम से फिर से तौहीद का केंद्र बन गया। *हमारी ज़िम्मेदारी है कि ऐसे नाज़ुक अवसर पर ग़लतियों से तौबा करें, अपने अख़लाक़ और चरित्र को संवारें, घर और समाज को दीनदार बनाएं और पूरे साहस के साथ प्रतिकूलता का सामना करने का दृढ़संकल्प लें।

#Team_Work
#BabriZindaHai
#5AugustBlackDay #5_अगस्त_काला_दिन #5_August_Black_Day #शहीद_बाबरी_मस्जिद #BabriZindaHai

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