बंगलादेश ढांका में तब्लिग़ी जमाअत इज्तिमा में खुनरेज़ी
Bangladesh Dhaka mai Tablighi Jamaat Kai Ejtaima mai Khonraizi
बंगलादेश ढांका में तब्लिग़ी जमाअत के इज्तिमा में दो गुट (साद साहब गुट, शुराई गुट) आपस में भीड़े खुनरेज़ी हुई 4 लोगों की जान गई ओर तकरीबन 60 लोग घायल हैं
यह घटना बहुत दुख तकलीफ़ पहुचाने वाली है
इस घटना ने मुसलमानो का सिर शर्म से निचे झुका दिया है
बताया जा रहा है कि यह झड़प मौलाना साद साहब और शुराई निज़ाम वालो के समर्थकों के बीच हुई है यह झड़प में खुनरेज़ी तक हो गई है इसे समझने के लिए आप को कुछ साल पहले हुई घटनाओ पर नज़र डालना होगी
यह झगड़ा तकरीबन 2016 का है यह मामला दिल्ली निज़ामुद्दीन तब्लिग़ी जमाअत मरकज़ से शुरू हुआ था वोह भी रमज़ान के माह में खुब झगड़ा हुआ था सिर्फ इस बात पर की तब्लिग़ी जमाअत का निज़ाम कैसे चलेगा? ईमारत से या शुराइयत से? इस को लेकर कइ दिनों से टाॅप लिडर शिप में गरमा गर्मी चल रही थी उस का अंत यह हुआ की तब्लिग़ी जमाअत में दो फ़ाड़ हो गई फिर क्या था हिंदुस्तान पाकिस्तान बंगलादेश सभी जगह जहां भी तब्लिग़ी जमाअत का काम है वहां आपस में एक दुसरे में इख्तिलाफात बड़ते चले गए इख्तिलाफात इतने बड़ गए की मुकामी अफ़राद इस दो निज़ाम की वजाह से आपस में लड़ने लगे जब जमाते एक दुसरे की क़ब्ज़े वाली मस्जिद में चली जाती तो एक गुट दुसरे गुट का सामान मस्जिदो से निकाल कर बाहर फैंक देता है
एक गुट दुसरे गुट को बर्दाश्त नहीं करता शुराई निज़ाम वाले साद साहब के गुट को बर्दाश्त नहीं कर रहे हैं ओर साद साहब के गुट वाले शुराई निज़ाम वालो को बर्दाश्त नहीं कर रहे हैं जब की एक ही मस्लक एक ही जमात एक ही किताब से तबलिग़ कर रहे हैं
बंगलादेश की शुराई गुट की तब्लिग़ी जमाअत साद साहब के गुट वाली तब्लिग़ी जमाअत को आतंकवादी संगठन बता कर बैन करने की बात कर रही है यह तो ओर भी ज़्यादा दुःख तकलीफ़ ओर शर्मसार करने वाली बात है की अब हम इस इसतर पर आ गए हैं
तब्लिग़ी जमाअत तो बहुत ही अमन पसंद खुश अखलाक खामोश मिजाज़ पुरअमन जमाअत समझी जाती है लेकिन यह जमाअत अभी दो गुटों में बंटी हुई है ख़ानाजंगी का शिकार बनी हुई है
बंगलादेश तब्लिग़ी जमाअत के इज्तिमा में जो हुआ है वह बहुत ही शर्मसार कर देने वाली घटना है इस घटना से उम्मत के इस ख़ैर के काम को बहुत नुक्सान होगा यहां तब्लिग़ी जमाअत के आफरद इतनी गिरी हुई हरक़त केसे कर सकते हैं जबकि तब्लिग़ी जमाअत की तो बुनियादी तालीम ही फ़साद से दुर रहने की है
तब्लिग़ी जमाअत की जो छः बुनियादी तालिमात है उस में 4.नं की तालिम इक्राम-ए-मुस्लिम है जिस के माअना (मुसलमानों के साथ अच्छा व्यवहार करना) लेकिन यहां तो आम मुसलमान से अच्छे अख्लाक से पेश आने की बात तो छोड़िए एक जमाअत के अफ़राद एक दुसरे की जानो के दुश्मन बन बेठें है
5. नं की तालीम इख्लास-ए-निय्यत है जिस का माअना (सच्ची और ईमानदार नीयत) है लेकिन यहां यह दोनों बुनियादी तालिमात पर अमल होता नहीं दिख रहा है
यह जमाअत तो नबी की सौ फिसद (100%) तालीम पर अमल करने की बात करती है लोगों को नेकियां करने की तर्ग़ीब दिलाती है नमाज़ रोज़े से जोड़ने का काम करती है अल्लाह से ताल्लुक को मज़बूत करने का काम करती है नबी के तरिके पर सौ फीसद (100%) अमल की दावत देती हैं ओर खुद इतनी बड़ी बुराई में मुब्तिला है इस तरहां का रवय्या तब्लिग़ी जमाअत को ज़ैब नही देता
कुरआन तो हमें भाई भाई बने रहने की तालीम देता है
Surat No 49 : سورة الحجرات - Ayat No 10
اِنَّمَا الۡمُؤۡمِنُوۡنَ اِخۡوَۃٌ فَاَصۡلِحُوۡا بَیۡنَ اَخَوَیۡکُمۡ وَ اتَّقُوا اللّ لَعَلَّکُمۡ تُرۡحَمُوۡنَ ﴿۱۰﴾٪ ؓ
मोमिन तो एक-दूसरे के भाई हैं, इसलिये अपने भाइयों के बीच ताल्लुक़ात को ठीक करो (18) और अल्लाह से डरो, उम्मीद है कि तुम पर रहम किया जाएगा।
इस आयात की रोशनी में हमें अब तब्लिग़ी जमाअत के अफरादो में सुल्ह का काम कमरना चाहिए उम्मत के इस सरमाए को बचाने की कोशिश करना चाहिए
एक हदीस का मफहूम है की एक मुसलमान पर दुसरे मुसलमान पर जान माल इज़्ज़त हराम कर दी गई है
एक ओर हदीस में आया है की कोई मुसलमान किसी मुसलमान की तरफ़ नेज़े के मुह की नोक तक ना करें
कामील मुसलमान वह है जिसकी ज़बान से ओर उस के हाथ के शर से एक मुसलमान महफुज़ रहे असल मुहाजिर वह है जिसने बुराई को छोड़ दिया हो
(सही बुखा़री)
रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया :
“कसम है उस ज़ात की जिस के कब्जे में मेरी जान है तुम जरूर बिज जरूर भलाइयों का हुक्म करो और बुराइयों से रोको;
वरना करीब है के अल्लाह तआला गुनहगारों के साथ तुम सब पर अपना अजाब भेज दे,
और उस वक्त तुम अल्लाह तआला से दूआ मांगोगे तो वो भी कबूल ना होगी।”
( तिर्मिज़ी )
हम सब को चाहिए कि इस बुराई को रोकने की कोशिश करें इन के ज़िम्मेदारो से मुलाकात करें लोकल लेवल पर भी बातचित करें जहां भी इस तरहां की घटना आप के अपने शहर में देखें उसे रोकने की कोशिश करें तब्लिग़ी जमाअत के बाअसर समझदार सुलझे हुए लोग आगे आएं ओर इस फितने बुराई को खत्म करें आपस में कोई काॅमन प्रोग्राम बानाए दोनों फरिक मिलकर अपने कुछ उसुल बनाएं जिस से आगे चल कर इस तरहां की कोई ओर घटना ना हो पाए
तब्लिग़ी जमाअत उम्मत का बहुत महनत के साथ खड़ा किया हुआ सरमाया है इसे फितने से बचाने के लिए कुछ पहल करना चाहिए
अल्लाह कुरआन में भाईचारा बड़ा ने के लिए एक हुकम देता है
Surat No 3 : سورة آل عمران - Ayat No 103
وَ اعۡتَصِمُوۡا بِحَبۡلِ اللّٰہِ جَمِیۡعًا وَّ لَا تَفَرَّقُوۡا ۪ وَ اذۡکُرُوۡا نِعۡمَتَ اللّٰہِ عَلَیۡکُمۡ اِذۡ کُنۡتُمۡ اَعۡدَآءً فَاَلَّفَ بَیۡنَ قُلُوۡبِکُمۡ فَاَصۡبَحۡتُمۡ بِنِعۡمَتِہٖۤ اِخۡوَانًا ۚ وَ کُنۡتُمۡ عَلٰی شَفَا حُفۡرَۃٍ مِّنَ النَّارِ فَاَنۡقَذَکُمۡ مِّنۡہَا ؕ کَذٰلِکَ یُبَیِّنُ اللّٰہُ لَکُمۡ اٰیٰتِہٖ لَعَلَّکُمۡ تَہۡتَدُوۡنَ ﴿۱۰۳﴾
सब मिलकर अल्लाह की रस्सी [ 83] को मज़बूत पकड़ लो और तफ़रक़े [ फूट] में न पड़ो। अल्लाह के उस एहसान को याद रखो जो उसने तुमपर किया है। तुम एक-दूसरे के दुश्मन थे, उसने तुम्हारे दिल जोड़ दिये और उसकी मेहरबानी और फ़ज़ल से तुम भाई-भाई बन गए। तुम आग से भरे हुए एक गढ़े के किनारे खड़े थे, अल्लाह ने तुमको उससे बचा लिया। [ 84] इस तरह अल्लाह अपनी निशानियाँ तुम्हारे सामने रौशन करता है, शायद कि इन निशानियों से तुम्हें अपनी कामयाबी का सीधा रास्ता नज़र आ जाए। [ 85]
Surat No 8 : سورة الأنفال - Ayat No 46
وَ اَطِیۡعُوا اللّٰہَ وَ رَسُوۡلَہٗ وَ لَا تَنَازَعُوۡا فَتَفۡشَلُوۡا وَ تَذۡہَبَ رِیۡحُکُمۡ وَ اصۡبِرُوۡا ؕ اِنَّ اللّٰہَ مَعَ الصّٰبِرِیۡنَ ﴿ۚ۴۶﴾
और अल्लाह और उसके रसूल की फ़रमाँबरदारी करो और आपस में झगड़ो नहीं, वरना तुम्हारे अन्दर कमज़ोरी पैदा हो जाएगी और तुम्हारी हवा उखड़ जाएगी। सब्र से काम लो [ 37], यक़ीनन अल्लाह सब्र करनेवालों के साथ है