रविवार, 14 जून 2020

Ideology of all Indian Political Parties

सियासी पार्टीयाँ ओर उनकी विचारधारा

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Ideology of all Indian Political Parties


भारत की सभी सियासी पार्टीयाँ धर्मनिरपेक्ष विचार धारा रखने का दावा करती हें। लेकिन यह दावा उन का कितना सच्चा हे उस की पोल खुल चुकी हें। फिर भी जो पार्टियाँ जंता मे यह भरम बनाये रखने मे कामयाब रही हे उन के नेता कुछ सिक्को की खनक या ओहदोे की लालसा मे इधर से उधर चले जाते हें यह आरोप नहीं हें यह हकीकत हें। जब से कांग्रेस, BJP, SP, BSP, RJD, JDU, ओर बहुत सी पार्टियों का निर्माण हुआ हे इन पार्टीयों के कई नेता एकसे दसरी फिर दुसरी से तिसरी पार्टी मे आते जाते रहें हें तो क्या अब इन पार्टीयों की असल विचारधारा बची हुई होगी ? या उन नेताओ की कोई विचार धारा थी ही नहीं बस जाहा अवसर मिला वहा चल दिये या उनका लक्षय ही अवसर तलाश करना होता हें जहा अपना थोडा फायदा,नफा,दिखता हें वहा का रुख कर लेते हें उस पार्टी की सदस्यता ग्रहण करलेते हें। वह नेता जिस पार्टी से जुडे होते हें पेहले तो उस का बहुत गुन गान करते हें उस की खराब नितीयों का भी बडी ढिठाई के साथ बचाव करते हें ओर विपक्षी पार्टीयों पर बेइंतिहा आरोप लगाते हे ओर तो ओर उस की अच्छी नितीयों का भी विरोध करते दिखाई देते हें। वह नेता जब पार्टीयाँ बदल कर उस पार्टी मे शामील हो जाते हें जिस को वह पानी पी पी कर कोसा करा करते थे आज वह उसी के कसीदे पड़ते दिखाई देते हें। यह जादातर तब ही क्यो होता हें जब पार्टी सत्ता मे होती हें नेता उसी पार्टी मे शामील क्यो होते हें ओर यदि वह विचारो की वजाह से एक से दुसरी तरफ जाते हें तो फिर उन नेताओ पर ही सवालिया निशान खडा होता हें की क्या वह पेहले गलत नीतियों ओर विचारो का साथ दे रहें थे जो अब वह इस पार्टी मे शामील हुए हें। नेताओ से जब यह सवाल किया जाता की पार्टी क्यो बदली तो उस पर नेताओ का एक रटा रटाया जवाब होता हे आत्मसम्मान आप को आत्मसम्मान वहा केसे मिलेगा जिस पार्टी के नेताओने आप को भी पानी पी पी कर बुरा भला कहा कोसा आप के लिए अपशब्दों का प्रयोग करा ओर आपने भी उस पार्टी ओर उन नेताओ को कोसा अब वही से आप को  आत्मसम्मान प्राप्त होने की आशा केसे होने लगी ? मजाकेखेस बात तो ये हें की जिनको कई साल भला बुरा कहा उनही के साथ एक स्टेज पर जाकर सदस्यता ग्रहण करनी पडती हे उनके बगल वाली कुर्सी पर बेठना पडता हें तब आत्मसम्मान कहा चला जाता हें तब शर्म महसूस नहीं होती हिचकिचाहट नहीं होती उस की आँखो मे आखे डाल कर केसे बात कर लेते हें यह आत्मविश्वास कहा से लाते हें ओह ये  क्या लिख दिया माफी चाहता हूँ ये बेशर्मी कहा से लाते हें।
(Shanawaz Khan Shannu)
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सोमवार, 8 जून 2020

जानवरो के हुकूक (Rights) इस्लाम मे


जानवरो के हुकूक (Rights) इस्लाम मे

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अभी एक गर्भवती हथनी की दर्दनाक मोत की खबर आई थी की एक गाय की भी विडियो चल रही हे उस विडियो मे भी दिख रहा हे की गाय बहुत ही ज़ख्मी,महु लुहान हालत मे हें। हम इंसान कही इंसानियत खोते तो नहीं जा रहे हें हमे अपने इन करनामो पे बहुत ही गेहराई के साथ सोच विचार करना चाहिए । हमे जानवरो से किस प्रकार का वेहवार करना चाहिए इस बारे मे इस्लाम धर्म किया केहता हे ओर जानवरों का हम किस प्रकार उपयोग करे उस मे इस्लाम हमारा क्या मार्गदर्शन करता हें । इस्लाम धर्म जानवरो की उपयोगिता भी बता ता हे इनका निर्माण कियो किया गया हे इस के साथ साथ इस्लाम धर्म ये भी बता ता हे की जानवरो के अधिकार क्या क्या हे इस्लाम धर्म सिर्फ मानव जाती के ही नहीं बलके जानवरो के अधिकार भी बता ता हे । सबसे पहले हम इस पर नज़र डालते हे की जानवरो का इस धर्ती पर जन्म का क्या उद्देश्य हे कुरआन केहता हे।  जानवरो को अल्लाह पाक ने तुम्हारे (इंसान)लिए पेदा फरमाया उन जानवरो मे तुम्हारे लिए पोशाक भी हें ओर खुराक भी ओर तरहा तरहा के दुसरे फायदे भी तुम्हारे लिए उस मे इज़्ज़त हे तुम उन जानवरो को शाम मे चरा कर लाते हो ओर चराने के लिए ले जाते हो ये तुम्हारे बोझ ऐसे शेहरो तक उठा कर लेजाते हें जाहाँ तुम सख्त मशक्कत के बग़ेर पहुच नहीं सकते बेशक अल्लाह बहुत ही शफिक ओर मेहरबान हें उसने घोडे,खच्चर ओर गधे पेदा किये ताके तुम उन पर सवारी करो ओर ज़िनत के लिए इस्तेमाल करो अल्लाह ऐसी चिज़ो का खालिक हे जिन को तुम जानते भी नहीं
( सुरेह नहल 5,6,7) यहा ये तो साबित हो गया की जानवरों का जन्म का उद्देश्य हमारे काम आना हे ये हमारी सेवा के लिए बनाए गए हें। अब जब ये हमारी सेवा के लिए बनाए गए हे तो हमारा भी इनके प्रति कुछ अधिकार होगा। आप जब नबी की हदीस (quote) पडेगे तो पता चलेगा की किसी जानवर के साथ दुर्व्यवहार करना कितना बडा गुनाह हे। एक बिल्लि की वजाह से एक ओरत को अल्लाह रब्बुल इज़ज़त जहन्नम
( नर्क ) मे डालता हे क्यो की उसने उसे बांध रखा था ओर खाने पिने को नहीं दिया जिसकी वजाह से उसकी मोत हो जाती हें वही दुसरी ओर एक ओरत को अल्लाह जन्नत (सुवर्ग) मे दाखील करता हे जबके वो फाहिशा (बाज़ारु) थी गुनाहगार थी लेकिन उस ने एक पियासे कुत्ते को पानी पिलाया था इसलिए उस को माफ कर के जन्नत मे दाखिल कर दिया जाता हें। एक ओर हेरत अंगेज वाकिया हें जिसमे अल्लाह बंदे का शुक्रिया आदा करता हें एक शख्स जो बहुत पियासा था पानी की तलाश मे था की अचानक उस को एक कुआ दिखाई देता हे उस मे से वह पानी निकालता हे ओर आपनी पियास बुझा लेता हे वही एक कुत्ता भी आ जाता हे वो बहुत पियासा होता हे उस की हालत बहुत ही खराब दिखाई देती हें उस शख्स को खायाल आता हें जब मे पियासा था मोत के करीब था मेरी भी यही कुछ हालत थी उसने उस पर तरस खाया ओर पानी पिला दिया उस पर अल्लाह ने बंदे का शुक्रिया आदा करा ओर उसे जन्नती करार दे दिया उन के साथ भी बेतर बरताव करा जाना चाहिए एक ओर पेहलु भी हे की जानवर बेशक हमारे उपयोग के लिए ही बनाए गए हे लेकिन उनका उपयोग केसे हो किस कदर हो ये भी हमारे नबी ने बता दिया हे एक हदीस मे ओर आता हे के तुम ज़मीन वालो पे रहम करो अल्लाह तुम पर रहम करेगा । इस हदीस मे किसी खास का नाम नहीं लिया हें  किसी खास धर्म,जात,पंत का नाम नहीं एक आम बात कही हे ज़मीन पर तो सभी बसते हे इंसान,जानवर,चरिंद परिंद,किडे मकोड़े,पानी के बेशुमार जानवर सभी पे रहम करने की बात कही गई हें। इस हदीस से एक बात ओर ज़ेहन मे आती हें रेहम तो हमे करना ही हें लेकिन हमारी कुछ आखलाकन ज़िम्मेदारी भी हे हजरत ऊमर रज़ि मेम्बर से खुतबा देते हे के मेरी खिलाफते दोर मे कोई कुत्ता दरिया नजला के किनारे पियासा मरजाता हें तो उस का ज़िम्मेदार मे हूँ अपनी हुकूमत मे बसने वालो की इतनी फिकर ओर आज के हुकमरा का हाल देख लो। जानवरो के साथ हुसने सुलूक पर भी नेकी मिलती हें वो इस हदीस से साबित हें। एक सहाबी ने नबी
(स. आ. वा) से पुछा या रसूलुल्लाह मे आपने जानवरो के लिए पानी भरता हूँ लेकिन दुसरे जानवर भी आकर पानी पिलेते हे तो क्या इस पे भी अर्ज हे आपने कहा हाँ हर तर जिगर वालि चिज़ मे सवाब हे ( Living Things) आपने एक सहाबी को ताकित किया की तुम अपने बेटे से कहो के अपने नाखुन काट लिया करे दुध निकालते वक़्त जानवर को तकलीफ ना हो ओर कुछ दुध छोड दिया करे ताके उसके बच्चे भी पिले सवारी के मुताल्लिक कहा के सवरी मे स्तेमाल उनही जानवरों का करो जो उसके लिए बनाए गए हें या उसके लायक हो गये हो ओर आप ने एक हिदायत ओर करी के सवारी को कुर्सी ना बनाओ बतलब अगर रसते मे किसी से बात करने की नोबत आए तो सवारी से उतर कर बात करो । नबी ने कहा इन जानवरो के बरे मे अल्लाह से खोफ खाओ जो बोल नहीं सकते । एक जागाह ओर हे जाहा हमसे कोताही होती हें की इनकी ताकत से ज़ादा बोझ लाद दिया जाता हे इस से भी नबी ने मना करा हे हमसे इस मामले मे बहुत ज़ादा ग़फलत हो रही हें जानवरों को भी बेतर ज़िंदागी जिने का अधिकार हें वो भी एक जानदार हें । जानवरो के अधिकार बहुत अच्छे तरीके से इस्लाम ने बताए हें ओर बहुत सी अहादीस ओर वकियात हे जो नहीं लिख पाया हूँ बस हम आगर पुरी तरहा इतनी ही बातो पे अमल करने वाले बन जाए तो हमारी अखीरत सवर जाएगी ओर जानवरो की ज़िंदागी।
( Shahnawaz Khan Shannu )
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