सियासी पार्टीयाँ ओर उनकी विचारधारा
.............................................................Ideology of all Indian Political Parties
भारत की सभी सियासी पार्टीयाँ धर्मनिरपेक्ष विचार धारा रखने का दावा करती हें। लेकिन यह दावा उन का कितना सच्चा हे उस की पोल खुल चुकी हें। फिर भी जो पार्टियाँ जंता मे यह भरम बनाये रखने मे कामयाब रही हे उन के नेता कुछ सिक्को की खनक या ओहदोे की लालसा मे इधर से उधर चले जाते हें यह आरोप नहीं हें यह हकीकत हें। जब से कांग्रेस, BJP, SP, BSP, RJD, JDU, ओर बहुत सी पार्टियों का निर्माण हुआ हे इन पार्टीयों के कई नेता एकसे दसरी फिर दुसरी से तिसरी पार्टी मे आते जाते रहें हें तो क्या अब इन पार्टीयों की असल विचारधारा बची हुई होगी ? या उन नेताओ की कोई विचार धारा थी ही नहीं बस जाहा अवसर मिला वहा चल दिये या उनका लक्षय ही अवसर तलाश करना होता हें जहा अपना थोडा फायदा,नफा,दिखता हें वहा का रुख कर लेते हें उस पार्टी की सदस्यता ग्रहण करलेते हें। वह नेता जिस पार्टी से जुडे होते हें पेहले तो उस का बहुत गुन गान करते हें उस की खराब नितीयों का भी बडी ढिठाई के साथ बचाव करते हें ओर विपक्षी पार्टीयों पर बेइंतिहा आरोप लगाते हे ओर तो ओर उस की अच्छी नितीयों का भी विरोध करते दिखाई देते हें। वह नेता जब पार्टीयाँ बदल कर उस पार्टी मे शामील हो जाते हें जिस को वह पानी पी पी कर कोसा करा करते थे आज वह उसी के कसीदे पड़ते दिखाई देते हें। यह जादातर तब ही क्यो होता हें जब पार्टी सत्ता मे होती हें नेता उसी पार्टी मे शामील क्यो होते हें ओर यदि वह विचारो की वजाह से एक से दुसरी तरफ जाते हें तो फिर उन नेताओ पर ही सवालिया निशान खडा होता हें की क्या वह पेहले गलत नीतियों ओर विचारो का साथ दे रहें थे जो अब वह इस पार्टी मे शामील हुए हें। नेताओ से जब यह सवाल किया जाता की पार्टी क्यो बदली तो उस पर नेताओ का एक रटा रटाया जवाब होता हे आत्मसम्मान आप को आत्मसम्मान वहा केसे मिलेगा जिस पार्टी के नेताओने आप को भी पानी पी पी कर बुरा भला कहा कोसा आप के लिए अपशब्दों का प्रयोग करा ओर आपने भी उस पार्टी ओर उन नेताओ को कोसा अब वही से आप को आत्मसम्मान प्राप्त होने की आशा केसे होने लगी ? मजाकेखेस बात तो ये हें की जिनको कई साल भला बुरा कहा उनही के साथ एक स्टेज पर जाकर सदस्यता ग्रहण करनी पडती हे उनके बगल वाली कुर्सी पर बेठना पडता हें तब आत्मसम्मान कहा चला जाता हें तब शर्म महसूस नहीं होती हिचकिचाहट नहीं होती उस की आँखो मे आखे डाल कर केसे बात कर लेते हें यह आत्मविश्वास कहा से लाते हें ओह ये क्या लिख दिया माफी चाहता हूँ ये बेशर्मी कहा से लाते हें।
(Shanawaz Khan Shannu)
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