मंगलवार, 3 दिसंबर 2024

तस्लीम चुडीवाला बेग़ुनाह बा इज़्ज़त बरी इन्दौर का चर्चित मामला


 तस्लीम चुडीवाला बेग़ुनाह बा इज़्ज़त बरी इन्दौर का चर्चित मामला 


FIR में छात्रा ने आरोप लगाया था कि तस्लीम जानबूझकर हिंदू नाम बताकर चूड़ी बेचने के बहाने से घर में घुसा था और जब मां अंदर पैसे लेने गई थी तो मुझे गलत तरीके से छूने लगा था। हालांकि कोर्ट में मामला साबित नहीं हुआ।

इंदौर की जिला अदालत ने उस मुस्लिम तस्लीम चूड़ीवाले को बरी कर दिया है, जिस पर नाबालिग से छेड़छाड़ करने और अलग-अलग नाम वाले कई आधार कार्ड रखने का आरोप लगा था। यह मामला उस वक्त पूरे देश में चर्चा में आ गया था, जब लोगों पर चूड़ीवाले का नाम पूछकर उससे पिटाई करने का आरोप लगा था। अब करीब तीन साल बाद इस केस का फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष अपना मामला साबित करने में विफल रहा है।

अभियोजन पक्ष अपनी कहानी को लेशमात्र भी साबित नहीं कर सका। 

सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता नाबालिग लड़की और उसके माता-पिता ने आरोपी (तस्लीम चुड़ीवाले) को पहचानने से ही इनकार कर दिया और प्राथमिकी के आरोपों को लेकर अभियोजन की कहानी का समर्थन नहीं किया।

कोर्ट ने तस्लीम चुड़ीवाले को आरोप साबित ना होने पर निर्देश बेगुनाह बताते हुए बा इज़्ज़त बरी कर दिया है 

फैसले के बाद तस्लीम ने कहा, ‘‘मैं बेगुनाह था। मुझे कुछ लोगों ने झूठे मामले में फंसा दिया था। हालांकि, मुझे देश के संविधान और न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा था।

वही तस्लीमा चुड़ीवाले ने इसे न्याय की जित बताते हुए कहा है कि मुझे किसी से कोई शिकायत नहीं है


यह तो पुरी ख़बर है लेकिन इस ख़बर पर वापसी अकर तियागी का एक लेख बहुत वायरल हो रहा है ज़रा उसे भी पढ़ें 

तस्लीम चूड़ी वाला याद है! यूपी का वही तस्लीम जो अगस्त 2021 में चूड़ी बेचने इंदौर गया था। और एक रोज़ चूड़ी बेचते हुए इंदौर के बाणगंगा क्षेत्र में पहुंच गया था। तस्लीम को पता नहीं था कि उस मौहल्ले के लोगों के लिए वह 'दूसरा' है। बस फिर क्या था! गले में ज़ाफ़रानी पट्टा डाले दक्षिणपंथियों ने तस्लीम की मोरल पुलिसिंग की। उसके सामान की तलाशी ली और उसे जानवरों की तरह पीटना शुरू कर दिया। उन ज़ाफ़रानी जाॅम्बीज़ ने एक ग़रीब मजदूर को पीटने का वीडियो भी बनाया। वीडियो वायरल हुआ, पुलिस हरकत में आई। इसके बाद जाॅम्बी गैंग ने थाने का घेराव कर लिया। जिसके बाद @MPPoliceDeptt भारी दबाव में आ गयी। पुलिस ने पीड़ित तस्लीम को ही गिरफ्तार कर लिया। ज़ाफ़रानी ज़ाॅम्बीज ने एक 12 वर्षीय बच्ची को ले आए, और उससे शिकायत कराई कि तस्लीम ने उसके साथ छेड़ खानी की है। तत्कालीन गृहमंत्री @drnarottammisra ने तस्लीम पर पहचान छिपाने का आरोप लगाकर, उसके साथ मारपीट को जस्टिफाई कर दिया। पुलिस ने तस्लीम को जेल भेज दिया गया। वह चार महीने जेल में रहा। सब खुश! ज़ाफ़रानी गैंग भी खुश, तस्लीम को पीटने वाले जाॅम्बी भी खुश, क़ानून के बजाय 'ऊपर' के 'आदेश' का पालन करने वाले पुलिसकर्मी भी खुश! क्योंकि इन सभी के बिछाए जाल में फंसकर एक बेगुनाह जेल चला गया था। आज अदालत का फैसला आया है। कोर्ट ने तस्लीम को बरी कर दिया है। पुलिस द्वारा गढ़ी गई कहानी अदालत में नहीं टिक पाई।बरी होकर तस्लीम खुश है। उसकी लड़ाई लड़ने वाले वकील खुश हैं। सभी न्याय प्रिय खुश हैं। लेकिन खुश किसलिए हैं! खुले आम क़ानून की धज्जियां उड़ाई गईं, इसलिए खुश हो जाएं? एक बेगुनाह जेल में रहा, तीन साल तक क्लंक के साथ जिया और अब बरी हो गया, इस पर खुश नहीं बल्कि अफ़सोस होना चाहिए कि भ्रष्ट सिस्टम किस हद तक पंगू बना हुआ है। जो राजनीति और सत्ता के दबाव में आकर नागरिकों की ज़िंदगी से खिलवाड़ करता है। उन जाहिल जाॅम्बीज को तो क्या ही कहें जिन्होंने एक इंसान की ज़िंदगी बर्बाद करने के लिए एक बच्ची का सहारा लिया! क्या उस बच्ची के माता-पिता को ज़रा भी ग़ैरत नहीं आई होगी? जो अपने बच्चों को इस तरह इस्तेमाल करा रहे हैं! सोचिएगा! यह कुंठा किस हद तक इंसान को गिरा रही है।


 कापी वासीम अकर तीयागी की ट्विटर अकाउंट वाल से 

https://twitter.com/WasimAkramTyagi/status/1863992748535095805?t=BpPvsdOPNFMcmL-WXP6pDQ&s=19


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