मंगलवार, 14 जुलाई 2020

Urdu removed from Dehradun railway station sign board BJP

Urdu removed from Dehradun railway station sign board BJP



सम्बित पात्रा ने एक ट्विट करा देहरादून के रेलवे स्टेशन पर लगे साइन बोर्ड का जिसमें उर्दू गायब थी ओर उसकी जगह संस्कृत थी संस्कृत लिखी हुई थी इस से कोइ तकलीफ नही हे ओर ना होनी चाहिए क्यो की भाषा से केसी तकलीफ संस्कृत भी लीख देते ओर होना भी चाहिए क्यो की भारत की सबसे पुरानी भाषा हे लेकिन उन को इतनी समझ कहा ओर जब इंसान नफरत में डूब जाता हे तो उस के सोचने समझ ने की ताकत खत्म हो जाती हें उन की यह नफ़रत पे कोई ताज्जुब नहीं हें लेकिन उन हे यह ज़रुर समझना होगा की भाषा संवाद के लिए होती हे जिस से आप आपने विचार एक दुसरे से व्यक्त करते हे आपनी भावना,विचार, इरादे व्यक्त करने हेतु होती हें इस पर किसी धर्म,जाती,पंत के लोगो का अधिकार नही होता सभी सीख सकते हे तथा बोल,लिख सकते हें ओर उर्दू भाषा भारत मे ही जन्मी हे यही की भाषाओं ओर फार्सी अर्बी के शब्दों को मिला कर बनी हें जो भी हो किसी भाषा से इतनी नफरत क्यो भाषा तो एक प्रतिभा,कौशल हे भाषा से केसा बेर,नफरत,घर्णा वोतो एक दुसरे के करीब लाने के लिए होती हे हर भाषा का अपने आप मे महत्व होता हें भाषा छेत्र की होती हे किसी धर्म,जाती,पंत की नही होती हें हर छेत्री भाषा को महत्व ओर बडावा देना चाहिए क्यो की उस से उस छेत्र के लोगो का लगाव होता हें हर कोम की कामयाबी उस की भाषा के विस्तार पर निर्भर करती हें यही वजा हे के वेस्टर्न मुल्क इतनी तरक्की कर रहे हें चाईना ओर अन्य देशो मे उनकी ही मात्र भाषा मे ही शिक्षा दी जाती हें ओर हमारे देश यानी हिंदुस्तान में अंग्रेज़ी भाषा को बहुत ज़ादा महत्व दिया जाता हे जिस कारण छात्रों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए पेहले तो अंग्रेजी सीखना पड़ती हे उस के बाद शिक्षा प्राप्त कर सकते हे जिस करण भारत मे अशिक्षा का रेशो अधिक हें यदि यही शिक्षा हिंदी,उर्दू,पंजाबी,गुजराती, मे होतो भारत ओर तरक्की कर सकता हे हम अब मुद्दे पर फिर आते 

बेहर हाल ओरो से कोई गिला शिकवा नहीं क्यो की उर्दू के साथ खुद मुस्लिम समाज ने कोनसा इंसाफ़ किया हें हमारे नौजवान नसल मे भी कोई दिलचस्पी नहीं हे उर्दू के साथ हमारा भी रवैया कोई बहोत अच्छा नहीं हे ओर इस हालत के सबसे बडे ज़िम्मेदार हमारी स्कूल की शिक्षा व्यवस्था हें उर्दू वा दिनयात भी पढ़ाई जाती हे यह सिर्फ नाम के लिए हें जिन स्कूल मे पढाई जाती हे वहा के बच्चे12वी कक्षा पास कर चुके होते हे ओर उनहें उर्दू लिखना तो दुर पढना भी नहीं आती हें हमारे भी दुकानो के बोर्ड से उर्दू गायब हें स्कूल शिक्षा से हर जगह से गायब हे इस के ज़िम्मेदार सिर्फ ओर सिर्फ हम हें 
उर्दू को ज़िंदा सिर्फ रेलवे स्टेशन के साइन बोर्ड पे लिख जाने से नहीं होगी इस से कुछ आगे बड कर काम करना पडेगा हमारे नौजवान नसल को उर्दू की ऐहमीयत बतानी होगी उन को उर्दू सिख ने के लिए उभारना पड़ेगा उस के लिए उर्दू की प्रतियोगिता करनी होगी जिस से उन को उर्दू सीख ने में दिलचस्पी पेदा होगी ओर अन्य भी कार्य कर सकते हैं जो उर्दू को बडावा दे शुक्रिया
शाहनावाज़ खान शान्नू

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#اردو

آج سمبیت پاترا نے ایک ٹویٹ ۔۔۔۔دہرادون کے ریلوے اسٹیش پر نصب بورڈ کا ۔۔۔جس میں اردو غائب تھی ۔۔اور اسکی جگہ سنسکرت تھی ۔ان کی اس نفرت پے ہمیں کوئی تعجّب نہیں ۔۔کہ یہ انکا سیاسی اجینڈا ہے ۔۔

لیکن لیکن اردو کے تعلق سے آج ہمارے یہاں اور خصوصاً نوجوان نسل میں بھی ادم دلچسپی کا رویہ دیکھا جاتا ہے ۔۔
اور ان حالات کے ذمدار ہم خود ہیں ۔۔۔دوسرے سب سے بڑے ذمدار اس تعلق سے ہمارے تعلیمی ادارے ہیں ۔۔جو پوری طرح ہمارے پاس ہیں ہمارے خود کے ہیں ۔جن پر ہمارا مکمّل اختیار بھی ہے ۔۔
"اردو اور دینیات کی تعلیم دی جاتی ہے "
یہ جملہ اکثر اسکولوں کے داخلہ فارم پر لکھا پایا جاتا ہے ۔۔ لیکن ہوتاکیا ہے ۔
وہ بچہ جو ہمارے اسکول سے پڑھ کر نکلتا ہے ۔۔ان میں ذیادہ تر ۔نہ دوسطور پڑھ سکتے ہیں ۔اور نا ہی ایک سطر لکھ سکتے ہیں۔
ایسا کیوں ہے ۔۔یہ ایک الگ اور طویل بحث کا موضوع ہے ۔۔۔
دوسری سب سے بڑی وجہ آج ہمارے علاقوں سے بازار میں دکانوں سے اردو میں لکھے بورڈ غائب ہیں ۔
اس سب کا ذمدار کون ہے ۔؟؟؟؟

شاہ نواز خان   شنو
ہندی سے ترجمہ ۔۔۔
ڈاکٹر فیاض فیض

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