इस्लाम में Valentine Day मनाना हराम क्यों है Girl Friend Boy Friend बाना ना हराम क्यो हैं ?
Islam mai Valentine Day Haram Kiyo Hai
Sorry Velentine Day I Am Muslim
इस जादीद दोर में बेहयाई, फहश, उरयानियत का दुसरा नाम Valentine Day हैं इस दिन नफ्स के ग़ुलाम नौजवान अल्लाह के खौफ से खाली अपनी सारी शर्म वा हया को ताक में रख कर हराम काम की इंतहा को पहुंच जाते हैं अल्लाह ने अपने नफ्स की तस्किन हासिल करने के लिए निकाह के ज़रिए मर्द ओर औरत के ताल्लुकात को हलाल किया है
इस्लाम में बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड रखनें का कोई रिवाज नहीं है
अल्लाह ने मर्द ओर औरत के साइज़ साम्बंध बाना ने के लिए निकाह की रस्म को रखा है ओर जो इकाह के बग़ैर अपने रिश्ते को कायम करता है वह गुनाहगार होगा अल्लाह के आज़ाब का मुस्ताहीक़ होगा
अल्लाह के बंदों ओर बंदियों नेक रास्ते पर चलो तुम्हें जो पसंद है ओर वह दीन ए इस्लाम को मनने वाला है अल्लाह ओर उसके रसुलो पर ईमान रखता है तो उस से निकाह कर लो ताकी हराम से बच जाओ ओर हलाल का रस्ता अपनाओ
अल्लाह कुरआन में हिदायत करता है के
وَ لَا تَقۡرَبُوا الزِّنٰۤی اِنَّہٗ کَانَ فَاحِشَۃً ؕ وَ سَآءَ سَبِیۡلًا
﴿۸﴾ زنا کے قریب نہ پھٹکو ، وہ بہت برا فعل اور بڑا ہی برا راستہ
ज़िना के करीब ना फटको वह बहुत ही बुरा अमल हैं 17:32
इस आयात पर अगर आप ग़ोर करे तो यह बात समझ में आऐ गी के सिर्फ़ ज़िना करने को मना नहीं किया जा रहा है बलके उस के करीब जाने तक से रोका जा रहा हैं। यहा तक के वो आमाल जो आप के नफ्स को हराम काम करने पर उभारते हैं उस के लिए भी मना किया गया हैं । हम अच्छी तरहाँ जानते हैं के ज़िना जेसा फैल कोई एकदम से नहीं हो जाता है उस के लिए नज़दीकिया बडाना शर्त हैं जब आप किसी के नज़दीक ही नहीं हो गे तो ज़िना का फैल ही नहीं होगा इसी लिए इस्लाम पर्दे पर इतना ज़ोर देता हैं ओर यह पर्दा सिर्फ औरतो के लिए ही नहीं हैं मर्दो के लिए भी हैं लेकिन मर्दो का पर्दा औरतों जेसा नहीं हैं कुरआन मर्दो के पर्दे के बरे में क्या कहता हैं इस आयात को पढे
قُلۡ لِّلۡمُؤۡمِنِیۡنَ یَغُضُّوۡا مِنۡ اَبۡصَارِہِمۡ وَ یَحۡفَظُوۡا فُرُوۡجَہُمۡ ؕ ذٰلِکَ اَزۡکٰی لَہُمۡ ؕ اِنَّ اللّٰہَ خَبِیۡرٌۢ بِمَا یَصۡنَعُوۡنَ
اے نبی ( صلی اللہ علیہ وسلم ) ، مومن مردوں سے کہو کہ اپنی نظریں بچا کر رکھیں 29 اور اپنی شرمگاہوں کی حفاظت کریں ، 30 یہ ان کے لیے زیادہ پاکیزہ طریقہ ہے ، جو کچھ وہ کرتے ہیں اللہ اس سے
باخبر رہتا ہے ۔
ऐ नबी ( स. आ. वा ) मोमिन मर्दो से कहो के अपनी नज़रो को निची रखे ओर अपनी शर्मगाह की हिफाज़त करे ये उन के लिए ज़ादा पाकीज़ा तरिका हैं जो कुछ वह करते हैं अल्लाह इस से बाख़बर रहता हैं 24:30
अगर आप इस सुरह में पर्दे का ज़िक्र देखे गे तो औरतों का ज़िक्र मर्दो के बाद हैं पहले ताकीद मर्दो को की जा रही हैं की तुम आपनी निगाह नीची रखो फिर इसी आयात के बाद अल्लाह औरतो को खिताब कर के कहता हैं
وَ قُلۡ لِّلۡمُؤۡمِنٰتِ یَغۡضُضۡنَ مِنۡ اَبۡصَارِہِنَّ وَ یَحۡفَظۡنَ فُرُوۡجَہُنَّ وَ لَا یُبۡدِیۡنَ زِیۡنَتَہُنَّ
اور اے نبی ( صلی اللہ علیہ وسلم ) ، مومن عورتوں سے کہہ دو کہ اپنی نظریں بچا کر رکھیں ، 31 اور اپنی شرمگاہوں کی حفاظت کریں ، 32 اور 33 اپنا بناؤ سنگھار نہ دکھائیں 34 بجز اس کے جو خود ظاہر ہو جائے ،
और ईमान वाली औरतों से कह दो कि वे भी अपनी निगाहें बचाकर रखें और अपनी शर्मगाह की हिफाज़त करें। और अपने शृंगार प्रकट न करें, सिवाय उस के जो उन में खुला रहता है। 24:31
अल्लाह बेहयाई को पसंद नहीं फरमाता वो तो उस के बंदे को हयादर बनाना चाहता है अल्लाह बंदे को हयादार क्यो बनाना चाहता हैं यह आप को इस हदीस से पता चलेगा ( हया से हमेशा भलाई पैदा होती है बुख़ारी – 6117 ) अल्लाह अपने बंदे को नेक,सालेह, बनाना चाहता हैं एक ओर हदीस में हया को ईमान कहा गया हैं ( ईमान की 60 से ज्यादा शाखें है और हया भी ईमान की एक शाख है बुख़ारी ) यानी अगर कोई शर्म ओर हया नहीं करता समझो वो इमान वाला नहीं ऊपर की आयात में तो ग़ैर मेहरम को देखने तक से मना करा हैं तो छूना तो दुर की बात हैं हाथ या बदन का कोई ओर हिस्सा किसी नामेहरम को छू जाए उस पर नबी करीम ( स आ वा ) ने बहुत ही सख्त अलफाज़ो में एक मिसाल देकर कहा हैं । जो मर्द ओर औरत दोनो के लिए हैं एक हदीस में आता हैं। किसी शख्स के लिये किसी नामेहरम को छूने से बेहतर है कि उसके सिर में लोहे का कीला घुस जाये।【तबरानी फिल कबीर 486 ; सहीह अल जामेअ लिल बानी 5045】लेकिन बेहयाई, बेशर्म की हद तो यह हैं की नौजवान तो नामेहरह को गाड़ी पर बिठा कर घुमाने फिराने को बहतर समझता हैं ओर तो ओर उस पर फ़ख़्र महसूस करता हैं । बेहयाई,बेशर्मी मुसलमान को कमज़ोर ओर बुज़दिल बना देती हैं हर कोम की जान नौजवान नसल होती हैं उस पर एक बहुत उम्दा बात कही हैं फ़ातेहे फिलिस्तीन -सुल्तान सलाहुद्दीन अय्यूबी रह. ने अगर किसी कौम से बिना लड़े उसे तबाह करना हो तो उसके नौजवानों में बेहयाई आम कर दो; वो कौम अपने आप तबाह हो जायेगी।” अगर हम तबाही से बचना चहते हैं इस दुनिया में भी ओर आख़िरत में भी तो खुदाया फहश, उरयानियत, बेहयाई से तौबा करो अल्लाह कुरआन में तौबा के मुताल्लीक क्या कहता हैं ज़रा गौर करे
یٰۤاَیُّہَا الَّذِیۡنَ اٰمَنُوۡا تُوۡبُوۡۤا اِلَی اللّٰہِ تَوۡبَۃً نَّصُوۡحًا ؕ عَسٰی رَبُّکُمۡ اَنۡ یُّکَفِّرَ عَنۡکُمۡ سَیِّاٰتِکُمۡ وَ یُدۡخِلَکُمۡ جَنّٰتٍ تَجۡرِیۡ مِنۡ تَحۡتِہَا الۡاَنۡہٰرُ ۙ یَوۡمَ لَا یُخۡزِی اللّٰہُ النَّبِیَّ وَ الَّذِیۡنَ اٰمَنُوۡا مَعَہٗ ۚ نُوۡرُہُمۡ یَسۡعٰی بَیۡنَ اَیۡدِیۡہِمۡ وَ بِاَیۡمَانِہِمۡ یَقُوۡلُوۡنَ رَبَّنَاۤ اَتۡمِمۡ لَنَا نُوۡرَنَا وَ اغۡفِرۡ لَنَا ۚ اِنَّکَ عَلٰی کُلِّ شَیۡءٍ قَدِیۡرٌ ﴿۸﴾
اے لوگو جو ایمان لائے ہو ، اللہ سے توبہ کرو ، خالص توبہ19 ، بعید نہیں کہ اللہ تمہاری برائیاں تم سے دور کر دے اور تمہیں ایسی جنتوں میں داخل فرما دے جن کے نیچے نہریں بہ رہی ہوں 20گی ۔ یہ وہ دن ہوگا جب اللہ اپنے نبی کو اور ان لوگوں کو جو اس کے ساتھ ایمان لائے ہیں رسوا نہ کرے21 گا ۔ ان کا نور ان کے آگے آگے اور ان کے دائیں جانب دوڑ رہا ہوگا اور وہ کہہ رہے ہوں گے کہ اے ہمارے رب ، ہمارا نور ہمارے لیے مکمل کر دے اور ہم سے درگزر فرما ، تو ہر چیز پر قدرت رکھتا ہے22 ۔
ऐ ईमान लाने वालो ! अल्लाह के आगे तौबा करो, सच्ची पक्की तौबा करो । बहुत सम्भव है कि तुम्हारा रब तुम्हारी बुराइयाँ तुम से दूर कर दे और तुम्हें ऐसे बाग़ों में दाख़िल करे जिन के नीचे नहरें बह रही होंगी, जिस दिन अल्लाह नबी को और उन को जो ईमान लाकर उस के साथ हुए, रुसवा न करेगा। उन का नुर उन के आगे-आगे दौड़ रहा होगा और उन के दाहिने हाथ मे होगा। वे कह रहे होंगे, "ऐ हमारे रब! हमारे लिए हमारे नुर को मुकम्मल कर दे और हमें माफ कर। ओर हमे से दरगुज़र फरमा तु हर चीज़ पर कादीर हैं ।" 66:6
हदीस में भी आता हैं के हर इंसान ख़ताकार हैं लेकिन सब से बहतर ख़ताकार वो हैं जो तौबा करने वाला हैं । अल्लाह रहीम वा करीम हैं वो माफ करने पर कादीर है लेकिन माफी या तौबा भी उस म्यार की मांगना पड़ेगी जीस तरहाँ का गुनह हैं ।
हमारी मोत से पहले पहले तौबा का दरवाज़ा खुला हैं अब भी मोका हैं के हम तौबा करले ओर सीधे रास्ते पर चलने का अज़म करे उस रासते पर जिस पर अल्लाह ने ईनाम रखा हैं ना के उस रासते पर जिस पर अल्लाह ने अज़ाब का फैसला कर रखा हैं
ओर तोबा का मतलब यह नहीं है की ज़बान से चंद अल्फाज रसमी तोर से बोल देना या गालो को पिट लेना बल्कि दिल से सच्ची पक्की तोबा करना ओर यह अज़म करना की अब से यह गुनाह ये बुराई नहीं होगी
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