इस्लाम मे खुद खुशी
( Suicide ) हराम क्यो हैं ?
Islam mai Khudkhushi Suicide Kiyow haram hai
क्या खुद खुशी हर तरहाँ की मुसीबत, परेशानी, दुख, तकलीफ का हल हे ? नहीं बिलकुल भी नहीं किसी भी तरहाँ का दुख, तकलीफ का हल खुद खूशी नहीं हैं । बलके मुसीबत का डट के सामना करना चाहिए क्यो की हर परेशानी मुसीबत कुछ वक्त के लिए ही होती हैं जो कभी ना कभी तो खत्म होनी ही हैं । जो इंसान उस मुसीबत, तकलीफ पर सब्र करले जिस मे वो मुबतीला था तो उस पर उसे अज्र हैं
اُولٰٓئِکَ یُؤۡتَوۡنَ اَجۡرَہُمۡ مَّرَّتَیۡنِ بِمَا صَبَرُوۡا وَ یَدۡرَءُوۡنَ
ये वो लोग है जिन्हें इनके सब्र के बदले में दोहरा बदला दिया जाएगा।
[अल क़ुरआन 28:54]
اِنَّمَا يُوَفَّى الصّٰبِرُوْنَ اَجْرَهُمْ بِغَيْرِ حِسَابٍ
हम सब्र करने वालों को बग़ैर हिसाब अज्र देंगे
[अल ज़ुमर-10]
وَ بَشِّرِ الصّٰبِرِيْنَۙ
सब्र का दामन थामे रहने वालों को ख़ुशख़बरी दीजिए। [ अल बक़रह-155 ]
وَ لَمَنْ صَبَرَ وَ غَفَرَ اِنَّ ذٰلِكَ لَمِنْ عَزْمِ الْاُمُوْرِ
अलबत्ता जो शख़्स सब्र से काम ले और दरगुज़र कर दे, तो ये बड़ी हिम्मत के कामों में से है।
[अश्शूरा -43]
इस तरहाँ की ओर बहुत सी कुरआनी आयात हैं जिन में सब्र करने पर अल्लाह की तरफ से इनामात के वादे हैं । तुम पर जो भी आज़माइश, मुश्किलात आए गी वो बहुत ही थोडे से वक्त के लिए आती हैं फिर दुर होजाती हैं अल्लाह इसी को कुरआन में कुछ इस अंदाज़ से कहता हैं
فَاِنَّ مَعَ الۡعُسۡرِ یُسۡرًا ۙ﴿۵﴾
اِنَّ مَعَ الۡعُسۡرِ یُسۡرًا ؕ﴿۶﴾
चुनाँचे हक़ीक़त ये है कि मुश्किल के साथ आसानी है।
यक़ीनन मुश्किल के साथ आसानी है।
[अल क़ुरआन 94:5-6 ]
मुश्किल के बाद आसानी ही आसानी हैं तो हमे चाहिए की सब्र करे सब्र करने पर बेशक अल्लाह की तरफ से इनामात हैं इस के बरअक्स नाउमीद होकर खुद खुशी करने पर अल्लाह के ग़ज़ब का मुसतहीक होगे। ओर नाउम्मीदी कुफ्र हैं । जिस तरहा के भी सख्त से सख्त हालात हो तो उस से निजात अल्लाह ही से मागो क्यो के हम पर जो हालात आए हैं वह सब अल्लाह की तरफ से ही हैं ओर इन हालात को दुर करने वाला अल्लाह ही हैं अल्लाह सब कुछ देखता ओर सुनता हैं हमारी सारी मुश्किले वही हल कर सकता हैं इस बात को अल्लाह कुछ युँ कहता हैं
قَالَ لَا تَخَافَاۤ اِنَّنِیۡ مَعَکُمَاۤ اَسۡمَعُ وَ اَرٰی ﴿۴۶﴾
कहा, “डरो मत, मैं तुम्हारे साथ हूँ, सब कुछ सुन रहा हूँ और देख रहा हूँ।”
[अल क़ुरआन 20:46]
लेकिन कुछ नादान अल्लाह के सामने अपनी फरयाद रखने के बजाय यह सोच कर खुद खुशी करते हैं के वह मुसीबत से निजात पा जाए गे लेकिन यह उन की ग़लत फैहमी हैं बलके खुद खुशी करने के बाद जो मुसीबत, परेशानी, दुख ओर तकलीफे, अज़ाब की शक्ल में नाज़ील होगी जो कभी ख़त्म नहीं होगी बलके दुनिया के दुख ओर तकलीफ से ज़ादा सख्त होगी ओर हमेशा हमेशा रहेगी । हदीस में आता हैं की
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ الْوَهَّابِ، حَدَّثَنَا خَالِدُ بْنُ الْحَارِثِ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ سُلَيْمَانَ، قَالَ: سَمِعْتُ ذَكْوَانَ يُحَدِّثُ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ، عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، قَالَ: ""مَنْ تَرَدَّى مِنْ جَبَلٍ فَقَتَلَ نَفْسَهُ فَهُوَ فِي نَارِ جَهَنَّمَ، يَتَرَدَّى فِيهِ خَالِدًا مُخَلَّدًا فِيهَا أَبَدًا، وَمَنْ تَحَسَّى سُمًّا فَقَتَلَ نَفْسَهُ فَسُمُّهُ فِي يَدِهِ يَتَحَسَّاهُ فِي نَارِ جَهَنَّمَ خَالِدًا مُخَلَّدًا فِيهَا أَبَدًا، وَمَنْ قَتَلَ نَفْسَهُ بِحَدِيدَةٍ فَحَدِيدَتُهُ فِي يَدِهِ يَجَأُ بِهَا فِي بَطْنِهِ فِي نَارِ جَهَنَّمَ خَالِدًا مُخَلَّدًا فِيهَا أَبَدًا"".
हज़रत अबू हुरैरह ؓ रज़ि बयान करते हैं कि नबी ﷺ ने फ़रमाया:
के जिस ने पहाड़ से अपने आप को गिराकर खुद खुशी करली वह जहन्नम की आग में होगा ओर उसी में हमेशा पड़ा रहेगा ओर जिस ने ज़हर पिकर खुद खुशी करली वह ज़हर उस के साथ में होगा ओर जहन्नम की आग में वह उसे उसी तरहाँ हमेशा पिता रहे गा ओर जिस ने लोहे के किसी हथियार से खुद खुशी कर ली तो उस का हथियार उस के हाथ में होगा ओर जहन्नम की आग में हमेशा के लिए वह वह उसे अपने पेट में मारता रहे गा
[ सही बुखारी 5778 ]
जिस ने किसी चिज़ से खुद खुशी करली तो उसे जहन्नम में उसी से अज़ाब दिया जाए गा
[ सही बुखारी 6105 का आधा तुकडा़ ]
इस हदीस से भी वाज़े होता हैं की अगर खुद खुशी करने वाले ने फांसी के फांदे का इस्तेमाल करा हो, पानी में डुब कर अपने आप को हलाक करा हो, ज़हर खाकर अपने आप को हलाक करा हो तो वह दोज़ख़ में भी उस तकलीफ में रहगा जिस अंदास से अपने आप को हलाक करा था मतलब साफ हैं मुश्किलात से छुटकारा नहीं बलके उस में इज़ाफ़ा ही होना हैं
अब खुद ही तै करो के मुश्किलो का सामना करना हैं या खुद खुशी करना हैं किस अमल को अपने लिए बहतर समझते हो खुद खुशी कर के तो नुकसान ही नुकसान हैं दुनिया का भी ओर आखिरत का भी खुदाया इस खुद खुशी जेसे अमल को तरक कर के सब्र करे जिस से अल्लाह आप से खुश होगा ओर आप को अल्लाह जन्नत के बाग़ो में दाखिल करे गा इंशा अल्लाह ।
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